लालूजी का हिंदी अंग्रेज़ी पॉपकॉर्न

फोटो साठ??र-चेन्नई टीवीकुछ दिनों पहले जब अमिताभ बच्चन ने अपना ब्लॉग लिखना शुरू किया था तब ये ख़बर सुर्खियां बन गई थी। बाद में आमिर खान से लेकर अनुराग कश्यप तक तमाम लोगों के नाम सामने आए जो या तो ब्लॉग लिख रहे थे या हाल फिलहाल उन्होंने लिखना शुरू किया था। अमिताभ, आमिर जैसे सेलिब्रेटी सितारों के ब्लॉग लेखन की ख़बर उड़ते ही बड़ी शिद्दत से ये चर्चा भी छिड़ी थी कि क्या इन सितारों के पास लिखने के लिए फुर्सत है? मिनट-मिनट की कमाई का हिसाब लाखों में दिखाने वाले सितारों के ब्लॉग प्रेम पर चर्चा छिड़नी लाजिमी था। क्या नाम को भुनाने के लिए हर हथकंडे अपनाने वाले ये सितारे ब्लॉग का भी स्वहिताय उपयोग करेंगे? लिखेगा कोई और छापेगा कोई और नाम होगा अपना। आखिर किसको पता चलता है जैसी तमाम बातें हुई।

 

हाल ही में एक और नेता कम अभिनेता ने भी अपना ब्लॉग शुरू किया है। रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के पॉपकार्न डॉट कॉम की चर्चा ब्लॉग जगत में है। दातून से लेकर दूध दूहने तक को मीडिया में बेचने का हुनर जानने वाले लालू के ब्लॉग पर चर्चा छिड़ना उतना ही जायज था जितना संसद में उनके द्वारा पेश किए गए रेलबजट पर जिरह जरूरी होती है। बड़ी चर्चा के बीच किसी मित्र ने बताया कि लालू का ब्लॉग तो क्या रेल शिकायत निवारण फोरम है। लोग उनके लेख से सरोकार कम रखते हैं रेल से जुड़ी अपनी शिकायतें वहां टिप्पणियों के रूप में जरूर दर्ज करवा देते हैं। बहरहाल देश के इतने बड़े नेता ने ब्लॉग शुरू किया था तो उस पर एक नज़र डालना भी जरूरी था। एक पत्रकार के नज़रिए से, एक ब्लॉगर के नज़रिए से और सबसे ऊपर एक आम नागरिक के नज़रिए से।

 

किसी वेबसाइट ने ख़बर छापी थी कि अपने ब्लॉग में लालूजी ने शाहरुख ख़ान के साथ फिल्म में काम करने की हसरत का इजहार किया है लगे हाथ वो हेमा से अपने पुराने प्रेम का इजहार करना भी नहीं भूले। उनकी दलीले भी लाजवाब हैं, जब फिलम वाले नेतागिरी में आ सकते हैं तो नेता लोग फिलम में क्यों नहीं जा सकते। यानी कि दोस्ती यारी की गंगा दोनों तरफ से बराबर बहनी चाहिए। बहुत राज कर लिया फिल्म वालों ने एकतरफा। राजनीति क्या कोई पार्ट टाइम धंधा है कि पूरी ज़िंदगी फिल्म में बिताई और बुढ़ापा सुख से काटने के लिए यहां आ गए। अब ऐसा नहीं चलेगा। लालू जी बिल्कुल तैयार हैं। फिल्मों को पार्ट टाइम धंधा बना कर छोड़ेंगे।

 

बहरहाल अपना मुद्दा कुछ और था। मैंने भी लालूजी का पॉपकॉर्न देखा। मन में वही शंका थी कि क्या लालूजी खुद इन ब्लॉग्स को लिखते होंगे। अब सीधे सीधे आरोप तो नहीं लगाया जा सकता लेकिन मन ये मानने को तैयार नहीं कि लालू ने इस तरह की भाषा में लिखा होगा। मेरी आंशंका के दृढ़ होने की वजह है। लालूजी का ब्लॉग हिंदी और अंग्रेज़ी दोनो भाषाओं में उपलब्ध है। पहले अपन ने उनकी अंग्रेजी वाला तर्जुमा पढ़ा (पता नहीं हिंदी से इंगलिश में तर्जुमा है या इंगलिश से हिंदी में)। वहीं से दिमाग में खुजली होने लगी। लालूजी की इतनी बेहतरीन इंगलिश देखकर विश्वास ही नहीं हुआ। दिमाग में तीन महीने पहले उनका लाइव इंटरव्यू घूम गया जिसे वो एनडीटीवी 24 सेवेन के मुखिया प्रनय रॉय को दे रहे थे। लालूजी की अंग्रेजी जिस अटकाव और भटकाव के दौर से गुजर रही थी उससे ये विश्वास करना मुश्किल हो गया कि ये लालूजी का ब्लॉग है। तीन महीने में इतना जबर्दस्त सुधार हजम नहीं हुआ। अपन लोग भी उसी परिवेश से आए हैं लिहाजा अनुमान लगा सकते हैं। इसके बाद दिमाग में आया कि अंग्रेजी तो छोड़ो चलो हिंदी वाली देख ली जाय। यहां मामला नागनाथ से छूटे तो सांपनाथ गले पड़ गए वाला हो गया। इतने फूहड़ अंदाज़ में हिंदी लिखी देखकर दिमाग चकरा गया। पिछला वाक्य कहां खत्म होगा और अगला कहां से शुरू होगा इसी का तारतम्य बिठाने में लेख समाप्ति की घोषणा हो गई।

 

अब हिंदी हृदय प्रदेश से आने वाले लालूजी की हिंदी इतनी खराब होगी ये बात भला किसके गले उतरेगी। कुल मिलाकर समझ में आया कि लालूजी की बोलचाला की नकल करने के चक्कर में लिखने वाले ने सारा बंटाधार कर दिया। होना उलट चाहिए था कि उनकी हिंदी अच्छी होती और अंग्रेज़ी गड़बड़। तो बात गले से उतर जाती। अगर किसी को विश्वास न हो तो नीचे लालूजी के एक लेख का हिंदी और अंग्रेज़ी तर्जुमें का लिंक दे रहा हूं ग़ौर फरमाइएगा…

 

http://www.mypopkorn.com/blogs/celebrityblog.html?blogid=MTA=&hindi=1

http://www.mypopkorn.com/blogs/celebrityblog.html?blogid=MTA=

 

अपन तो यही कहेंगे लालूजी कि लगे रहिए मगर खुद लगिए तो ज्यादा मज़ा आएगा। आख़िर आपकी मौलिक अदा के ही तो भारतीय दीवाने हैं। दूसरों के जरिए इसे कैसे बरकरार रख पाएंगे।

 

अतुल चौरसिया

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4 टिप्पणियाँ

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4 responses to “लालूजी का हिंदी अंग्रेज़ी पॉपकॉर्न

  1. हम भी गए थे लालू जी के ब्लाग पर. बहुत शिकायतें कर रखी थी हमने लालू जी की रेल की इन चार सालों में, पर एक भी शिकायत का जवाब नहीं मिला. लालू जी के ब्लाग पर जाने का यही मकसद था कि ‘शिकायत का जवाब न मिलने की’ शिकायत करेंगे. शिकायत की भी पर ब्लाग पर छपी ही नहीं. पता नहीं क्या चक्कर है हमारी कोई टिपण्णी लालूजी का ब्लाग स्वीकार ही नहीं करता. इस बारे में आप लोगों का क्या अनुभव है. कहीं कुछ पैसा बैसा तो नहीं देना पड़ता इस के लिए?

  2. “लेकिन जो नेता जो हैं वो आज भी नॉर्म्स को, अपनी संस्कृति को, अपनी विरासत को, राजनीति में जो गरिमा में जो हो सकता है, जो सही मामले में जो लीडरशिप का गुण होना चाहिए आज विद्यमान है”. ऐसे नेता कहाँ हैं आज देश में? सच पूछिए तो आज़ादी के बाद इस देश में कोई नेता हुआ ही नहीं. नेतागिरी को एक व्यवसाय बना दिया है आज के तथाकथित नेताओं ने. नेता और अभिनेता दोनों ऐक्टिंग करते हैं नेता और अभिनेता होने की, और वह भी बड़ी फूहड़.

  3. अभी तो चालू हुए है. जब रिटायर हो जायेंगे तो खुद भी लिखेंगे..वरना करेंगे क्या!! 🙂

  4. Niraj

    Laloo ji ki bolti band ho gai. Laloo Bihar me Nitish Kumar sa patkhani kha gaye. Laloo kewal jat pat ki rajniti karte hai.

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