शिकारी लड़कियां !

बात ही बात में बैठे-बैठे वो घटना याद आ गई। इसे बीते छह साल हो चुके हैं लेकिन यादें एकदम ताज़ा है। सआदत हसन मंटो की कहानी “शिकारी औरतें” से मिलता जुलता शीर्षक होने पर भ्रम में न पड़े, इसका इस कहानी से कोई लेना-देना नहीं है। एक लड़का पहली पहली बार दिल्ली की सड़कों की खाक छानने उतरा था। अपने भविष्य की सुनहरी दास्तान लिखने के लिए दूर से चमकते दमकते नज़र आने वाले इस शहर की ओर पलायन इधर बहुत आम हो चला है। दिल्ली में एक भी नजदीकी रिश्तेदार, यार या फिर घर परिवार का नहीं था। कॉलेज में एडमिशन के लिए दिल्ली के दो स्थानीय लोगों का रेफरेंस देना आवश्यक था। उसका जुगाड भी फर्जी तरीके से करना पड़ा। फर्जीवाड़े की शुरुआत शहर में पहला क़दम रखते ही हो गई थी। बहरहाल ये एक अलग बहस का मुद्दा है जिस पर चर्चा फिर कभी।

शहर से 26 किलोमीटर की दूरी पर गाज़ियाबाद में इलाहाबाद के एक मित्र के चाचाजी रेल विभाग में कर्मचारी थे। कुल जमा यही एक व्यक्ति मिले थे जो इस अनजान नगर में रास्ता दिखा सकते थे। लड़का गाज़ियाबाद उतरा, अगले ही दिन पीजी के लिए प्रवेश परीक्षाएं होनी थी। दिल्ली में परीक्षा थी चाचजी ने सबकुछ समझा दिया था। बातों ही बातों में एक चीज़ उन्होंने समझायी जो उस समय बड़ी अटपटी लगी। एक घटना बतायी जो कुछ इस तरह थी कि यहां कुछ इस तरह की लड़कियां घूमती रहती हैं जो लड़कों को पहले बहलाती फुसलाती हैं और फिर उसके साथ लूटपाट करती हैं। इसके लिए वो अपने लड़की होने का पूरा फायदा उठाती हैं। इस दरम्यान चाचाजी ने ये भी बताया कि उनका ही एक सगा भांजा प्लाजा सिनेमाहॉल में इस तरह की घटना का शिकार हो चुका है। बात आई गई हो गई। ऐसे भी इस तरह की घटनाएं आम नहीं होती। और फिर जिसे प्रवेश परीक्षा देनी थी उसे इन चीज़ों से क्या लेना-देना।

बहरहाल लड़का अगले दिन गाज़ियाबाद से ईएमयू पकड़ कर दिल्ली पहुंचा, वहां से परीक्षा के लिए नियत कॉलेज पहुंचा। परीक्षा दी और कॉलेज से बाहर निकला। थोड़ी देर आराम करने के लिए पास ही के एक पेड़ की छांव में खड़ा हो गया। अनजान जगह होने की वजह से किसी से कोई बातचीत भी नहीं थी। लिहाजा अकेले ही किनारे जाकर बैठ गया। बमुश्किल पांच मिनट ही बीता था कि सभ्रांत सी दिखने वाली लड़की जिसके हाथों में छाता भी था, आकर लड़के के सामने खड़ी हो गई।

लड़की ने कहा- एक्सक्यूज़ मी…

लड़का अनजान जगह पर अनजान लड़की के इस व्यवहार से अचकचा गया। कुछ कहने की बजाय हल्के से हंस भर दिया।

लड़की ने फिर कहा- आप मेरी हेल्प कर सकते हैं।

लड़के ने कहा- क्या हेल्प?

लड़की- मुझे कुछ फोन करने हैं पर पैसे नहीं हैं।

ये बड़ी आजीब बात था। लड़के ने ध्यान से देखा उसने लेवाइस की जींस पहन रखी थी। पर उसके पास पैसे नहीं थे। भले ही मोबाइल आम नहीं हुआ था लेकिन दो चार दस रूपए तो होते ही हैं।

लड़के ने कहा- आप फोन कर लीजिए मैं पैसे दे दूंगा। कितने चाहिए।

लड़की- आप खुद ही चल लीजिए पीसीओ तक।

लड़का- अरे नहीं आप बताइए कितना चाहिए।

लड़की- भइया चल कर आप ही कर दीजिए यहीं पास ही में तो पीसीओ है। मुझे क्या पता कितना लगेगा।

लड़का- ठीक है।

ऐसा कहते ही लड़की एक गली की तरफ जाने लगी। लड़के से उसने कहा कि गली की नुक्कड़ पर पीसीओ है। अनजान शहर में गंवई लड़के के साथ हो रही इस घटना से उसके दिमाग में कई तरह की बातें तो पहले से ही घुमड़ रही थी। आखिर क्यों लड़की पैसा लेने की बजाय खुद लड़के को पीसीओ तक ले जाने का ज़ोर डाल रही थी। उस पर एकाएक लड़के के दिमाग में चाचाजी की एक दिन पहले कही गई बात याद आ गई। इस ख्याल ने उसके मन में चल रही उथल पुथल को एकदम से आवेग प्रदान कर दिया। लड़का एखदम से पीछे पलटा और देखते ही देखते गली से निकल कर कॉलेज के सामने आ खड़ा हुआ जहां लड़के-लड़कियों का हुजूम खड़ा हो रखा था। तब जाकर उसकी जान में जान आयी। वो लड़की कहीं नज़र नहीं आ रही थी। लड़का इसके बाद चाचाजी के बताए के हिसाब से बस और ट्रेन पकड़ता हुआ गाज़ियाबाद की ओर रवाना हो गया। रास्ते भर उसके दिमाग में कुछ निश्चित बातें घूम रही थी, क्या वास्तव में चाचाजी की बात सच थी? इतनी जल्दी इस तरह की घटना से मेरा वाकया कैसे पड़ गया? क्या उस लड़की को वास्तव में पैसों की जरूरत थी? या फिर वो भी उन्ही लड़कियों के गिरोह की थी? या फिर क्या लड़के के माथे पर लिखा था कि वो नया है इस शहर में?

वो लड़का खुद मैं ही था। कई साल बीतने के बाद भी वो बात जब तब हमारे बीच चर्चा का विषय बन जाती है। लेकिन उसका दूसरा छोर गायब है क्योकि उसी कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद भी फिर न कभी इस तरह के वाकए से सामना हुआ न उस इलाके में कभी वो लड़की दिखी।

अतुल चौरसिया

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6 टिप्पणियाँ

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6 responses to “शिकारी लड़कियां !

  1. क्या पता सच में ही जरुरत रही हो मगर क्या करियेगा इंसान ही तो इंसान पर से इंसान का विश्वास उठवा देता है अपने कर्मों से. आपने अपने विवेक से अच्छा किया भाग आये वर्ना क्या पता??? कहीं कचोट जरुर बाकी है तभी संस्मरण की बात आई..शुभकामनाऐं.

  2. adesh

    jo hua achhacha hua aapne jo kiya wohi karna chahiye kisi bhi anjan ko

  3. ‘’Because God loved the world that gave His holy Son to die for us in our place for those who believe in Him will be save who doesn’t believe in Him will go to hell.’’ Jo 3:16.

    PRAY

    Jesus forgive my sins. You died on the cross for me come and live into my heart forever.

    God i believe you set your Holy son to die for us in our place because of this forgive our sins and coming to live into our hearts forever in giving forever life just you can make us to have God inside.

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