आपसी लड़ाई में घुटती ब्लॉगिरी

lewi.gifपता नहीं मुझे इस मामले में पड़ना चाहिए या नहीं पर मन नहीं मान रहा। अपना दोनों से बढ़िया नाता है। मोहल्ला भी मेरे ब्लॉग पर हाजिर है और भड़ास भी। मज़े की बात है कि दोनों ही अपन को इससे ज्यादा नहीं जानते और अपन भी दोनों को इतना ही जानते हैं। हो सकता है ये फटे में टांग अड़ाने वाली बात हो। पर जो भी हो रहा है ठीक नहीं हो रहा है। ऐसा लग रहा है कि दोनों पक्ष मिलकर इस बतंगड़ का मज़ा लूट रहे हैं। पिछले दो दिनों से इन दोनों ने मिलकर तकरीबन एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को ही हाईजैक सा कर लिया है।
इस सारी लड़ाई के बीच जो सबसे निराशाजनक बात दिख रही है वो है भाषा का नरकीय पतन। अब तक तकरीबन सारी अनकही, टालनीय, मुंह छुपाने योग्य बातें यहां हो चुकी हैं। जिस तरह के ओछे लांछन लग रहे हैं वो अकल्पनीय हैं। जूतामार – कीचड़उछाल प्रतियोगिता में कोई भी हथियार नहीं डालना चाहता है। बीच बचाव की तो बात ही छोड़ दीजिए। हर आदमी कमर के नीचे वार कर रहा है।
क्या इस लड़ाई का कोई अंत नहीं है? शुरुआत में सबने बड़ी बड़ी बाते कही थी। ब्लॉग से हिंदी को ये होगा, हिंदी को वो होगा। सोने की चिड़िया वाला झुनझुना हिंदुस्तान की बजाय हिंदी को दिलाने का दम तो सब भर रहे थे। फिर अब क्या हो गया। ये लड़ाई किस बात की? क्या अपने अपने रास्ते जाना एक दूसरे को दरकिनार करने की समझदारी किसी में नहीं है। हर लेख में दोनों पक्ष दावा कर रहे हैं कि वो बहस को आगे बढ़ा रहे हैं। इस ओछी भाषा में बहस को आगे बढ़ाया जाता है भला। खुद को बुद्धिजीवी और पढ़ा लिखा होने का दंभ भी है लेकिन इसी ओछी भाषा में।
अरे भैया न तो वो तुम्हारे घर का चूल्हा जलाते हैं न ही तुम उनकी बिटिया की शादी करवाने जाओगे। फिर काहें की लड़ाई। सिर्फ दंभ और इगो की लड़ाई। तो फिर ये व्यक्तिगत लडा़ई किसी सार्वजनिक मंच से क्यों? Please don’t highjack the public platform. Let them move ahead BABA
जाने क्यों लगता है यहां भी हिंदी साहित्यकारों की तरह मठाधीशी का रोग लग गया है। उनकी मठाधीशी के चक्कर में पिछले पचास-साठ सालों मे हिंदी की दुर्गति तो आप सब देख ही रहे हैं। फिर एक उम्मीद की परवान चढ़ती रोशनी को धुंधला क्यों करते हो भाइयों।
अतुल चौरसिया 

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2 टिप्पणियाँ

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2 responses to “आपसी लड़ाई में घुटती ब्लॉगिरी

  1. बहुत बढिया विचार. पर यह सब चलता रहेगा आपने लिखा अच्छा किया पर तनाव मत लीजिये. आप बढिया लिखते हैं.
    दीपक भारतदीप

  2. chauraha

    धन्यवाद दीपक जी, आप लोगों का उत्साहवर्धन प्रेरणा देता रहेगा।

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