मैं कौन हूं?
विकट सवाल का सरल जवाब ये है कि पत्रकारिता को धर्म की तरह अपनाने की नीयत लेकर दिल्ली में दाखिल हुआ था पांच साल पहले। टेलीविज़न वालों ने ऐसी कुत्तई भरी पत्रकारिता करवाई कि सारा धर्म जाने कहां घुस गया। बड़ी शिद्दत से कोशिश करके इन दिनों एक सम्मानित स्थान पर कुछ करने की फिराक में हूं। नाम है तहलका। बाकी घर परिवार का पता छोटे से ब्रेक के बाद…



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March 1, 2008 at 0stUTC
एनडीटीवी के रवीश कुमार का कस्बा देख रहा था…लेकिन चौराहे पर आपको देख ठिठक गया.. आपके परिचय को पढ़कर लगा कि टीवी पत्रकारिता के जले हुए लोगों में से आप भी एक हैं… वैसे मैं साफ बता दूं कि आपके परिचय के साथ-साथ आपके जातिसूचक टाइटिल ने भी मुझे आपको लिखने को प्रेरित किया… ताकि कम से कम परिचय की गांठ तो लग ही जाए… अगर अच्छा किया तो मेल जरुर कीजिएगा…. मैं फिलहाल कुत्तई भरी टीवी पत्रकारिता (लाइव इंडिया) में ही भौंकने वालों के लिए लिखता हूं…
धन्यवाद सहित……
आपका विनोद कु.मोदी(चौरसिया)
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