May 2, 2008

हमारा नेता चौड़े से…

कई दिनों से लिखने का शगुन नहीं बन रहा था, या कहें कि कुछ मजेदार लिखने को सूझ नहीं रहा था। आप इसे अपन का तंग हाथ कह सकते हैं, तो सोचा कि एकाध इलाहाबादी दिनों का संस्मरण लिखा जाय। विश्वविद्यालय की घनी पेड़ों की छांव में पढ़ाई लिखाई संबंधित क्रिया-कलापों के अलावा बाकी सब [...]