April 9, 2008...0thUTC
चीनी माल है, पाकिस्तानियों ज़रा संभल के…
कुछ साल पहले देश के बाज़ारों में चीन में बने सामानों की बाढ़ आ गई थी। खिलौने से लेकर झालर-मालर सब चीन के बिकने लगे थे। दो रूपए में इलेक्ट्रिक टॉर्च से लेकर और जाने क्या क्या… सब कुछ ऐसा लगता था कौड़ियों के मोल मिलने लगा हैं। जिसे देखों वहीं चीन के गुण गाता फिरता– “कम दामों में अगर बढ़िया सामान मिले तो कोई ये क्यों ले चीन वाला न ले।” चारो तरफ चिंताएं दिखने लगी। ये क्या चीन ने तो हमारे बाज़ारों पर कब्जा कर लिया। लोगों को इसमें चीन की साजिश भी नज़र आती थी। ज्ञान बांटने वालों की नज़र में चीन चतुरायी से भारत के माइक्रो लेवल (निचले दर्जे के) की अर्थव्यवस्था पर कब्जा कर रहा था। हमारे यहां का मजदूर वर्ग बेरोजगार हो जाएगा। चीन दिवाली के दीए से लेकर होली के रंग तक बना कर हमारे लघु उद्योगों को बर्बाद करने की साजिश रच रहा है।
बहरहाल तमाम चिताओं के बीच हवा से भरा ये गुब्बारा जल्द ही फुस्स होकर धड़ाम बोल गया। वजह थी रिलाएबिलिटी, विश्वसनीयता और गुणवत्ता। चीनी सामान इन सभी पैमानों पर लूले नज़र आने लगे। दस रूपए की टॉर्च दुकान से घर पहुंचते-पहुंचते कराहने लगती थी। दिवाली के झालर अगली दिवाली पर टिमटिमाना भूल जाते थे। खिलौने चलते चलते दम तोड़ देते थे। तब लोगों को इनकी असलियत का अंदाज़ा हुआ। आखिर भारतीय खरीददार ठहरा। हर चीज़ को ठोंक पीट कर उसकी मजबूती का अंदाज़ा लगा कर ही अंटी से पैसा ढीला करता है। यहां बात-बात में ये कहने का चलन तो आपको भी पता होगा कि, फलां चीज़ हमारे दादा के ज़माने की है। अब इस तरह की सामाजिक ताने बाने वाली मानसिकता में चीनी कब तक अपनी टुकटुकिया चमकाते। लिहाजा चार दिन की चांदनी के बाद आयी अंधेरी रात चीनी सामानों के लिए काल बन गई।
बहरहाल बेवक्त मुद्दे की भूमिका बनाने का मकसद था बीती रात पाकिस्तान से आयी एक ख़बर। पता चला कि वहां के खुशाब परमाणु संयत्र में धमाका हो गया। गैस के रिसाव से दो लोगों की मौत हो गई। बात तो गंभीर है। पर एक पहलू इसका ये है कि इस परमाणु संयत्र का निर्माण पाकिस्तान के सबसे अंतरंग मित्र चीन ने किया है। चीन ने पाकिस्तान से अपनी दोस्ती चमकाने के लिए तोहफे में यह संयत्र दिया है। टीवी के स्क्रीन पर ये ख़बर नज़र आते ही दोस्तों के बीच से एक सुर से हल्ला निकला चीनी माल पर भरोसा करोगे तो ऐसा ही होगा। भारत तो खेल खिलौनों से ही उनकी औकात जान गया। आप भी संभल जाओं, ये चीनी न किसी के हुए हैं न होंगे। आखिर भाई हो इसलिए बता रहे हैं। भले ही हमसे बैर रखो लेकिन चीन माल पर भरोसा मत करो। वरना क्या पता कल को खुशाब की तरह ही बाकी चीनी साजो सामान भी फेल हो गए तो फिर आतंकवाद से कैसे निपटोगे। खुद के पैरो पर खड़े होना सीखो।
अतुल चौरसिया



2 Comments
April 9, 2008 at 0thUTC
इसे कहते हैं रोना. आप वह बना नही पा रहे हैं, जो वह बना रहे हैं उन्हें आप साजिश कह रहे हैं. उसके ऊपर आप मुक्त व्यापार की बात करते हैं. यह बाजार है यहाँ चीजों के दाम मैं नही बाजार निर्धारित करता है
April 9, 2008 at 0thUTC
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