Entries from April 2008

April 24, 2008

रेल का लालूकरण या बिहारीकरण या फिर बिहार का रेलीकरण

बात शुरू करने से पहले दो बातें डिस्क्लेमर के तौर पर लिख दूं कि अपन को बिहार से रत्ती भर भी परहेज, घृणा या उस तरह की कोई परेशानी नहीं है जिस तरह का पर्याय “बिहारी” शब्द देश के अलग-अलग हिस्सों में बन गया है। विषय हाल ही में मेरी रेल यात्रा और उसके यात्रियों [...]

April 22, 2008

वसुधा भव कुटुंबकम वाया आईपीएल

ब्रेट ली ने कैफ को आउट किया किसी को कष्ट नहीं हुआ। साइमंड ने इशांत को चौका मारा टेंशन नहीं हुआ। माइक हसी ने हिंदुस्तानी गेंदबाज़ों की धज्जी उड़ा दी लोग मजे से तालियां बजा रहे थे। रिकी पोंटिंग ने दो कैच पकड़े लोग खुशी से झूम रहे थे।
ये कुछ झलकियां हैं क्रिकेट के अफलातून [...]

April 15, 2008

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का शोध उलटबयानी करता है

एक शोध के मुताबिक स्कूल कॉलेजों में लड़कियों की मौजूदगी से पढ़ाई का माहौल बेहतर बनता है। लड़कों की उद्दंडई काबू में रहती है। शिक्षकों और शिक्षार्थियों के बीच रिश्ते मजबूत और आत्मिक बनते हैं। भरी कक्षा में चाक-चिकोटी से लड़के परहेज करते हैं। लड़कियां कक्षा में सकारात्मक माहौल बनाती हैं। अब शोध किन पैमानों [...]

April 11, 2008

प्रेस* ( * कंडीशन अप्लाई)

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक उड़ती पड़ती ख़बर पर एक मित्र ने बातों ही बातों में सबका ध्यान खींचा। वाकया कुछ यूं था कि एक कार ने किसी मोटरसाइकिल सवार को टक्कर मार दी थी। बात बहुत आम सी थी। जगह की किल्लत वाले इस शहर में हर दिन जाने कितनी टक्करें होती हैं। लोग [...]

April 10, 2008

बंदूक के साए में शांति की मशाल…

गाहे-बगाहे मौका मिले तो दिल्ली के दिल इंडिया गेट का नज़ारा लेने जाइएगा। इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन के बीच तकरीबन दो किलोमीटर लंबी सीधी-सपाट सड़क को किसी पिंजरे में तब्दील कर दिया गया है। राजपथ की लाल मिट्टी खाकीमय हो गई है। लोगों की आज़ादी की वकालत करने वाला देश एक ग़ैर लोकतांत्रिक देश [...]

April 9, 2008

चीनी माल है, पाकिस्तानियों ज़रा संभल के…

कुछ साल पहले देश के बाज़ारों में चीन में बने सामानों की बाढ़ आ गई थी। खिलौने से लेकर झालर-मालर सब चीन के बिकने लगे थे। दो रूपए में इलेक्ट्रिक टॉर्च से लेकर और जाने क्या क्या… सब कुछ ऐसा लगता था कौड़ियों के मोल मिलने लगा हैं। जिसे देखों वहीं चीन के गुण गाता [...]

April 7, 2008

जो हुआ ठीक ही हुआ

फ्रांस में ओलंपिक मशाल बुझा दी गई। जो इतिहास में अब तक नहीं हुआ वो अब हो गया। ये तो दस्तूर है जो अब तक नहीं हुआ है ये जरूरी नहीं है कि आगे भी नहीं होगी। तिब्बतियों के विरोध प्रदर्शन पर लोगों की अलग अलग राय हो सकती है। उनके विरोध प्रदर्शन के दौरान [...]